संगीत सिर्फ वाद्ययंत्रों से ही नहीं बल्कि चेहरों से भी निकलता है

Photo Courtesy: galimohalla.in


ज़िन्दगी के सफर में कुछ पल शांत गहराई लिए होते हैं. एक ऐसी गहराई जहाँ मात्र आवाज़ का ही नहीं बल्कि आत्मा का अनुगुंजन भी होता है. अक्सर एकांत में हम अपने आप को ऐसे पलों में पाते हैं मन की गहराइयाँ तरेरते हुए. 

एकांत, भारतीयता का एक सामूहिक प्रयास भी है. जिसे बहुत से अजनबी मन थोड़े समय के लिए साथ रह कर बुनते हैं. 

एक पोस्टमास्टर की हैसियत से मेरा रिश्ता अजनबियों से ज़्यादा रहा है. 

अगर किसी अजनबी का चेहरा देख कर आपको कोई गीत या कविता याद आती है तो यकीन मानिये आप जीवन के कुछ उन्हीं अनुगुंजित पलों को जी रहे हैं जिनमें आप थोड़ा ज़्यादा जिए थे, जब आपने थोड़ी ज़्यादा गहरी सांस ली थी या किसी को बेहद प्यार से अपने मन में बसाया था.  

संगीत सिर्फ वाद्ययंत्रों से ही नहीं बल्कि चेहरों से भी निकलता है. कितना कुछ होता है ढलते सूरज की पीली रौशनी में नहाई आँखों में, जाने कौनसी राग बज रही होती है कुछ देर सो कर उठी अंगड़ाइयों में और न जाने कितने घुंघरू बज उठते हैं किसी अजनबी की एक मुस्कान में. 

शायद संगीत यही होता है जो मन की गहराइयों को अनुगुंजित करता है. 

बहरहाल सफर लम्बा हो या छोटा मुझे नींद नहीं आती. मेरे सफर में बहुत से घर आएंगे जहाँ चिट्ठियां बाँट कर मुझे वापसी की राह पकड़नी होगी. 

फिर मुलाकात होगी 

आपका पोस्टमैन 

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