वरुण ग्रोवर, मानवीय मूल्यों को नयी गहराई देता एक लेखक


कवि, स्टैंडअप कॉमेडियन, गीतकार, स्क्रीनप्ले राइटर और एक्टर, वरुण ग्रोवर वो सब हैं जो एक व्यक्ति बनने के सपने देखता है. कुछ अलग करने की चाह से नौकरी छोड़ मुंबई आने वाले वरुण स्टैंडअप करने लगे और टीवी के लिए लिखने लगे. अपने काम से इतिहास में नाम दर्ज़ करवाने की चाह उनसे बहुत कुछ लिखवाती रही. 2015 में फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ के गाने ‘मोह मोह के धागे’ के लिए उन्हें बेस्ट लिरिक्स के नेशनल अवार्ड से नवाज़ा गया. वरुण, जो भावनाओं और मानव जीवन की संभावनाओं के प्रति गहरी समझ रखते हैं आइये उन्हें उनके काम से थोड़ा समझने की कोशिश करें

  1. 1

    Gangs Of Wasseypur 1 & 2 (2012)

    JustWatch
    'तार बिजली से पतले हमारे पिया...', 'जिया तू बिहार के लाला', 'ओह वुमनिया' जैसे गाने लिख वरुण लाइमलाइट में आये. हालांकि लेखक के तौर पर वे पहले ही बहुत काम कर चुके थे. फिल्म के गाने किसी एक तार से बंधे नहीं है इसलिए वरुण का लिखा एक एक गाना दुनिया के अलग अलग कोनों से आती प्रतिध्वनियों जैसा सुनाई देता है.
  2. 2

    आँखों देखी (2014)

    आँखों देखी, एक ऐसी फिल्म जो जितनी मार्मिक है उतनी ही अकेली है. दुनिया को जब आप अपनी आखों से देखना शुरू करते हैं तो आप एक भीड़ से अलग हो जाते हैं. आप अकेले हो जाते हैं, आप दुनिया के अनगिनत सवालों के जवाब ढूंढने निकल पड़ते हैं. वरुण के गीतों को सुनकर लगता है की वो बहुत अलग हैं या बहुत अलग बनने की चाह रखते हैं. शायद ये फिल्म और इसके गीत सब वरुण के बेहद करीब हैं.
  3. 3

    दम लगा के हईशा (2015)

    'ये मोह मोह के धागे तेरी उँगलियों से जा उलझे' एक ऐसा गाना जो आपको एक अँधेरे कमरे में ले जाकर जैसे कहीं छोड़ देता है उसकी दीवारें नापने को, जैसे आपने गोता लगाया हो समंदर में उसकी गहराई नाप लेने को. अगर भावनाएं मापी जा सकती तो ये गाना मापने के लिए यक़ीनन नए नाप तैयार करने पड़ते. वरुण के लिखे इस फिल्म के सभी गाने आपको अपने लगेंगे, उन यादों की तरह जो शायद कभी मन यूँ ही अपने साथ जोड़ लेता है.
  4. 4

    मसान (2015)

    Indiatimes.com
    मसान एक कठिनाई है, अपने आप से एक लड़ाई है. आखिर क्यूँ दुःख कभी ख़तम नहीं होता. आख़िर दुनिया वैसी क्यूँ नहीं जैसी हम चाहते हैं. अनगिनत सवालों का बोझा ढोते हुए प्रेम कर पाना अगर इंसान होना है तो उस प्रेम को खो देना भी. मसान एक पर्व है, एक त्यौहार है. एक ऐसा त्यौहार जो हर पल हमारे आस पास घटित हो रहा है. वरुण ने इस ख़ूबसूरत फिल्म को लिखा भी है. मसान एक सच्चाई है, एक क्षणिक सच्चाई जो आप से कहती है कि प्यार में अगर आप बशीर बद्र की शायरी ना हुए तो क्या प्यार किया.
  5. 5

    उड़ता पंजाब (2016)

    The Indian Express
    'ख़ाली सी बोतल में रंगीन भर के ख़्वाब' ये लाइन अगर आपको 2 सेकंड के लिए रोक कर सोचने पर मजबूर नहीं करती है तो शायद आपने 'उड़ता पंजाब' गाना सही से सुना नहीं. वरुण का शब्दकोष जितना बड़ा है उस से कहीं ज़्यादा भरा हुआ उनका भावनात्मक बस्ता नज़र आता है. वरुण के गीत हमारे हैं तो वरुण के लिखे संवाद हमारे जीवन की परिभाषा. वरुण की कलम जितनी अपनी है, उतने ही हमारे हैं वो शब्द जो उस कलम से निकलते हैं.
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